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मेरा नाम साम है। मेरी उमर अभी 42 है। मैं स्कूल के दिनों से ही चोदने का बड़ा शौकीन हूं। लेकिन कभी मौका नहीं मिला तो मैं हाथों और किताबों से ही काम चला लेता था। बहुत बार लड़कियों को पटाने की कोशिश की लेकिन सफ़ल नहीं हो पाया। सैंयां की जगह भैया बोल के दिल दुखा देती। खैर ऊपर वाले के घर देर है लेकिन अंधेर नही है. मेरी जिंदगी में भी उजाले की किरण फूटी जब मैं ११वी कक्षा में था. मैं सायंस में था. हमारी बायोलोजी की टीचर स्कूल में नई आई थी, उनका नाम अमिता था. उस समय वो २३ साल की थी. बहुत सुंदर थी, उसका फिगर ३६-२६-३६, ऊंचाई ५'६", वो बहुत सेक्सी थी, सब टीचर उसके आगे पीछे घूमते थे लेकिन किसीके भाव नही देती थी. क्लास में वो हमेशा मेरे काम से खुश रहती थी और कई बार मेरी तारीफ भी करती थी। लेकिन मेरे दिमाग में एक ही बात आती थी कब मुझे ऐसी लड़की चोदने को मिलेगी. और एक दिन मौका मिल ही गया..... अक्तूबर का महीना था. शाम को स्कूल के छुटने के बाद बायोलोजी की हमारी एक्स्ट्रा क्लास थी. क्लास ख़तम होते होते ७ बज गए। अँधेरा हो गया था, सब जाने लगे तो एकदम से तेज हवा आने लगी और बारिश भी चालू हो गई। अमिता, मैं और चपरासी बारिश रुकने का इंतजार करने लगे। थोडी देर बाद चपरासी ने मुझे कहा तुम मेडम को घर छोड़ देना मुझे देर हो रही है इसलिए मैं जा रहा हूं। मैंने कहा ठीक है। बारिश रुकने का नाम ही नही ले रही थी. इतने में जोर कडाके के साथ बिजली चमकी तो अमिता डर गई और डर के मारे वो मुझसे लिपट गई. मैंने भी कुछ सोचा नही और अमिता को मेरी बाँहों में भर लिया। वो डर से कांप रही थी,थोडी देर तो वो ऐसे ही मुझसे लिपटी रही। अमिता की मस्त जवानी मेरी बाँहों में थी। मेरे सारे शरीर में बिजली सी दौड़ गई। मेरा मन और शरीर वासनामय होने लगा. लंड भी खड़ा हो गया था. अचानक वो शरमा के पीछे हट गई और मुझसे माफ़ी मांगने लगी। मैंने कहा कोई बात नही. फ़िर उसने कहा प्लीज़ मुझे घर छोड़ दो मुझे बिजली से बड़ा डर लगता है. और हम दोनों बारिश में ही घर की ओर निकल लिए. २० मिनिट में हम घर पहुंच गये. फ़िर उसने मुझे अंदर आने को कहा तो मैंने कहा फ़िर कभी (मै थोड़ा भाव खा रहा था लेकिन मन में लड्डू फ़ूट रहे थे,और ऐसा मौका हाथ से जाने देना नही चाहता था). फ़िर उसने पूछा कहीं पास में ही रहते हो, तो मैंने बताया की बाजू के गाँव में रहता हूं और जाने के लिए कोई व्यवस्था कर लूँगा क्योंकि आखरी बस तो ७.१५ को निकल जाती है. तो उसने कहा पागल तो नही हो गए क्या इतनी बारिश में कहाँ जाओगे, अंदर आओ मैं तुम्हे तौलिया देती हूँ, ड्राई हो जाओ और में तुम्हारे लिए चाय बनाती हूं, मैंने अपने कपड़े सुखाने के लिए रख दिए और तौलिया लपेट के बैठ गया.
बाहर जोरों
की हवा के
साथ बारिश
अभी भी चालू
थी. अमिता ने
कहा मुझे बाद में
उसने खाना
बनाया और साथ
बैठ के खाया.
जब वो किचन
में बर्तन
साफ मैंने भी
मौके की
नजाकत को
दखते हुए
उसको अपनी
बाँहों में
भर लिया. मेरा तीर
निशाने पर
लगा था. अब
मेरी हिम्मत
और बढ़ी.
मैंने अपने
होठों अब कोई
रूकावट नही
थी. हम दोनो
जोर से एक
दूसरे के
होठों को
चूसने लगे. उसकी चड्डी
भीग चुकी थी
इससे आप
अंदाजा लगा
सकते हैं की
वो कितनी मैं भी तैआर
था, उसने
दोनों पैर
मेरे कंधो पर
रख दिए ,अब
मैंने अपना
...वो जोर जोर
से
चिल्लाने
लगी ,मैंने
अपने होठं
उसके होठं
पर रख
दिए और एक धक्का मारा इस बार मेरा पूरा लंड उसकी चूत में घुस गया.....वो दर्द के मारे तड़पने लगी ...मैं थोडी देर उसके बूब्स को धीरे धीरे दबाता रहा और उसे चूमता रहा २ मिनिट बाद उसने थोडी राहत महसूस की तो अपने कुल्हे उठाने लगी ,अब मैंने धीरे धीरे अपना लंड अन्दर -बाहर करने लगा. अब उसकी स्पीड बढाती जा रही थी. करीब १० मिनिट बाद उसका शरीर तंग हो गया ...वो झड़ गई...अब पूरा कमरा फचक फचाक ..फचक की आवाज से गूंज रहता.....साथ में अमिता की सिस्कारियां आ..आया..या.य्य्य्य्य्य्य.ओह..या..या....ऊऊऊउईईईईईईईईईईईईईईईईई आआआआआआआआआआआह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह् आब मैंने भी स्पीड बढाई ....मेरा लंड अमिता की चूत में इंजन के पिस्टन की तरह अन्दर बाहर हो रहा था......अब मेरी बारी थी सांसे एकदम तेज हो गई ,दोनों पसीने से तर हो रहे थे.
हम अपनी
मस्ती में
सारी
दुनिया भूल
चुके थे.बस
हम और हमारी ..........फ़िर अचानक
नींद खुल गई ....मेरा
लंड खड़ा हो
गया था और
अमिता आज भी वो उतनी सुंदर और सेक्सी है ....अभी भी मौका मिलते हम मिलते है
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