प्रेषक : बिपिन जोशी

हाय मित्रो !

आज मैं आपको अपनी एक सच्ची कहानी सुनाने जा रहा हूँ।

हमारे पड़ोस में रूपा आंटी रहने आई थी। वैसे तो वो हमारी दूर की रिश्तेदार थी इसलिए जान-पहचान बनाने की जरूरत नहीं थी।

उनकी लड़की थी गुड्डी, बड़े बड़े स्तनों वाली, जांघें भी गोरी गोरी और थोड़ी कामुक थी लेकिन सीधी होने का दिखावा करती थी। मैं थोड़ा इश्कबाज़ लड़का हूँ इसलिए मेरी उससे जमती थी।

एक बार वो मुझे सब्जी मण्डी में मिल गई , बोली- बिपिन मेरे पास बहुत वज़न है, मुझे अपनी मोटरसाईकिल पर बिठा लो !

मैंने कहा- चलो !

वो मेरे पीछे बैठ गई। बाज़ार में भीड़ के कारण मोटरसाईकिल चलाते समय मैंने बहुत बार ब्रेक लगाए तो वो मेरे ऊपर गिरती थी। दो तीन बार थोड़ा शरमाई पर बाद में वो सेट हो गई और बोली- एक बार तुम्हारे घर पर मिलते हैं।

दस दिन बाद वो दिन आ ही गया। मेरे घर पे कोई नहीं था। मैंने उसको सुबह ही इशारा कर दिया था। फ़िर वो सबह नौ बजे आई, बोली- स्कूल जाने के बहाने नज़र छुपा के निकली हूँ।

मैंने कहा- अन्दर आ जा ! और उसे बेडरूम में छुपा दिया।

मैंने सारे दरवाज़े बंद कर लिए और बेडरूम में गया तो मेरे से रहा नहीं गया। मैंने उसको जोर से अपनी बाहों में ले लिया।

मैंने कहा- सलवार उतारो !

वो बोली- ऐसे नहीं !

इतना बोल कर वो घुटनों के बल बैठ गई और मेरी पैन्ट की ज़िप खोल कर मेरा लण्ड सहलाने लगी, फिर मुंह में ले लिया खूब रगड़ा उसने अपने मुंह से। और धीरे धीरे मेरे हाथ पकड़ कर अपने बूब्स पे ले आई। मेरे से रहा नहीं गया। मैंने अपनी पैन्ट और टी-शर्ट उतार दी, मैं पूरी तरह नंगा हो गया और उसको भी नंगा कर दिया।

फिर मैंने उसकी चूत को चाटना शुरू किया। उसे बहुत मज़ा आ रहा था -अह्ह्ह ....अहह हह ...अह हह ....अह ह करने लगी और उसके नंगे बदन पे मेरे हाथ फिरने लगे।

फिर ६९ पोसिशन में सेक्स करते रहे तो वो बोली- सोफे पर बैठ जाओ।