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शाम के सात बज रहे थे, मौसी ने मुझे बगल में बुला कर बिठा लिया, मैं मौसी के पास जाकर बैठ गई। रंडियों का नाच चालू था, कोठे पर भीड़ बढ़ गई थी। मौसी बोली, "३० लड़कियाँ चुदने जा चुकी हैं। २५-३० और बच रही हैं, आठ बजे तक सब बिक जाएँगी। उसके बाद तो दूसरा राउंड शुरू हो जाएगा, नाच-वालियाँ १० बजे तक नाचती हैं, उसके बाद इनको चुदवाती हूँ।"
तभी एक ग्राहक आकार सोना नाम की रंडी का दाम पूछने लगा। सोना, मौसी के पीछे ही बैठी थी। मौसी बोली, "५००० हैं, चूत और गाँड दोनों चुदवाएगी।"
"३००० दूँगा, पुराना ग्राहक हूँ।"
"हरामी तुझे बहुत अच्छी तरह जानती हूँ, ८ इंच लंबा लंड है तेरा, गाँड फाड़ कर रख देता है। पिछली बार रेशमा को चोदा था साली एक घंटे तक उठ नहीं पाई थी, चल ४००० दे और ले जा इसे। सोना, गाण्ड में क्रीम लगा लियो... वरना रोएगी, यह बहुत बड़ा चोदू है। और तू जरा आदमी की तरह चोदियो, वरना घुसने नही दूँगी कोठे पर... हरामी। सोना के अभी मुझे दो राउंड और कराने हैं"
मौसी मुस्कुराई, ग्राहक भी मुस्कुराते हुई सोना को लेकर चला गया। सस्ती रंडियों ( १०० से ३०० वालियों) की बिक्री राजू मुस्टंडा देख रहा था। मौसी ने उसे बुला कर पूछा - "कितने जमा हो गए?"
"सस्ती वालियों में से २० धंधे पे बैठी हैं मौसी। ३० मर्दों को निपटा चुकी हैं, १५ से चुदवा रहीं हैं। ५ उधर बैठी हुई हैं, २ बीमार हैं। कुल १४,००० रुपये जमा हुए हैं" - राजू ने जानकारी दी।
"टॉप पर कौन चल रही है?"
"अंगूरी टॉप पर है, २ बार चुदवा चुकी, १ को निपटाने में लगी हुई है। १२०० रुपये उसी के नाम के हैं।"
"ठीक है, आज ३०००० से कम की रक़म जमा नहीं होनी चाहिए। जा धंधा देख।"
पप्पू ५०० से १००० वालियों की दलाली कर रहा था। मौसी ने उस से पूछा, "धंधा कैसा चल रहा है?"
"मौसी, २४ लौंडियाँ धंधे पे हैं, २० बार बिक चुकी हैं, १९ अन्दर लगवा रही हैं, ५ चुदने का इंतज़ार कर रही हैं। कुल १६००० रूपये जमा हुए हैं।" - पप्पू ने उत्तर दिया।
मौसी ने नज़र लड़कियों की तरफ़ घुमा कर देखी और कहा, "यह रेखा और सीमा आजकल कम बिक रही हैं। कल भी सालियों ने एक-एक बार ही चुदवाया था। कम से कम साली ३-४ बार तो चुदें। ये रंडीबाज़ी ठीक से नहीं कर रही हैं। कल से सस्ती वालियों में बैठाती हूँ, जब रिक्शे वाले चोदेंगे तब मज़ा आएगा इन्हें। तू आज ५०००० रुपये कलेक्ट कर दियो, कुत्तियों को चाहे ८-८ बार चुदवाना पड़े।"
मौसी के पास बैठी १२ रंडियों में से ८ चुदने जा चुकी थीं। मुझे मिला कर ४ रंडियाँ बची थीं तभी वहाँ दो लड़के मौसी की तरफ़ आए और मुझे देख कर बोले - "मौसी नया माल लग रहा है, कितने में दोगी?"
"तू बता कितने में चोदेगा? पुराना ग्राहक है" - मौसी बोली
"दो-दो हज़ार ले लेना, इसके और मोनी के!"
"चोदू चोद तो बहुत चुका, लेकिन माल की समझ नहीं है तुझे, इसके संतरे देख ज़रा" - यह कहकर मौसी ने मेरे ब्लाउज़ का एकमात्र हुक खोल दिया।
मेरी गोल-गोल चूचियाँ फरफरा कर निकल पड़ीं। मैं एक दम से शर्मा गई, मैंने दोनों चूचियाँ अपने हाथों से छिपा लीं। मौसी डपट कर बोली - "हरामिन, ज्यादा नखरे किए तो यहीं सबके सामने चुदवा दूँगी मुस्टंडों से, चल हाथ हटा और मौसी ने मेरे हाथ को हटा दिया।"
अब मेरी चूचियों के दर्शन वो लड़के कर रहे थे, लड़कों के मुँह से निकल गया - "मौसी वाह, इसके संतरे तो बड़े लाजवाब हैं।"
मेरी चूत में खुजली बढ़ गई थी, मेरा मन अब चुदने का ज़ोरों से करने लगा था। मैं मन ही मन सोच रही थी की मौसी मुझे चुदने भेज दे इन लड़कों के साथ। लड़के बोले - "मौसी हम तो ५००० रुपये लाये हैं, इसे दे दो दो घंटे को ५००० में। हम-दोनों एक से ही काम चला लेंगे।"
मौसी बोली, "१०००० रुपये से कम में नहीं उठेगी। नयी रंडी है, तू कल चोद लियो इसे। तेरे बाप ने तो २०-२०,००० में रंडियों को चोदा है, ज़रा चूचियाँ मसल कर तो देख इसकी! ख़ुद ही कहेगा भाव अधिक नहीं है।"
मौसी ने मुझसे कहा - "जरा खड़ी हो कर चूची मसलवाने का मज़ा ले, पुराने ग्राहक हैं, यहाँ की हर बढ़िया रंडी चोद चुके हैं।"
मैं खड़ी हो गई, मेरी चूत पानी-पानी हो रही थी। एक लड़के ने मेरी दोनों चूचियों को हाथ में पकड़ कर कस-कस कर मसल दिया। मेरे मुँह से आह... ऊह... की आवाज़ निकल गई, इसके बाद वहाँ खड़े मुस्टंडे ने उसे हटा दिया। अब दूसरे वाले ने एक हाथ से मेरी एक चूची मसली और दूसरे से मेरी दूसरी चूची की घुंडी कस कर घुमा दी, मेरी चूत पानी-पानी हो गई।
मौसी ने मुझे हाथ पकड़ कर नीचे बैठा लिया। लौण्डों के लंड टनक चुके थे, मौसी ने बगल में बैठी दोनों लड़कियाँ उनकी तरफ़ बढ़ा दीं और बोली, "कल तेरे लिए इसे बुक करती हूँ, अभी तू इन दोनों की चूत फाड़" - और मौसी ने वे दो रंडियाँ उन्हें सौंप दीं।
अब मैं और मोनी, दो ही लड़कियाँ मौसी के पास रह गईं थीं। मौसी मेरी तरफ़ देखते हुए मुस्कुरा कर बोली, "मज़ा आया? देख तेरी चूचियाँ दिखा कर दोनों २-२ हज़ार में उठा दीं, वरना साली आज १००० में भी नही उठ रहीं थीं।"
मैंने कहा - "मौसी मस्ती तो बहुत आई।
डर नही मज़े कर, अभी तो तूने लौड़ा पकड़ कर भी नही देखा। फुल्ल मस्ती कर। चूत और गाँड तो तेरी तभी चुदेगी, जब तू ख़ुद कहेगी कि मौसी मुझे चुदवाओ।" - मौसी ने मेरे चूतङों पे हाथ फिरा कर कहा
मौसी बोली - "६ बजे से धंधा शुरू करवाती हूँ। पहला राउंड ६-९ चलता है, दूसरा ९-११ चलता है, तीसरा ११-२ चलता है। सस्ती वालियों को छोड़, बाकी सब १-१, २-२ घंटे के लिये उठतीं हैं। कुछ रंडियाँ एक राउंड में २-३ बार भी चुद लेती हैं, वरना एक-एक बार तो सबको चुदना ही पड़ता है। अगर कोई रात भर में तीन बार नहीं चुदती हैं तो उसको दिन में पेलवाती हूँ। दूसरे राउंड में ७-८ रंडियों को नंगा करा के मुस्टंडों और ग्राहकों की गोद में बिठाती हूँ। मुस्टंडे और ग्राहक उनकी चूचियों और चूत की मसलाई करते हैं और रंडियाँ उनके लौड़े निकाल कर मुट्ठ मारतीं हैं, जिन्हें दूसरे ग्राहक बड़े मस्त होकर देखते हैं। आज मोनी और तुझे ग्राहकों की गोद में उनके लौ़ड़ों पर बिठाऊँगी। जब वो तेरी चूचियाँ और चूत मसलेंगे, तो तुझे बड़ा मज़ा आएगा। आधे घंटे में यह मसलाई वाला शो कराती हूँ, ताकि ग्राहकों के लंड टनटनाएँ और सारी रंडियाँ जल्दी-जल्दी बिकें।"
मौसी की बात सुनकर मेरी चूत बुरी तरह सनसना गई और मेरी चूत में से पानी निकल गया। मौसी बोली, "अब तू एक काम कर, जा ज़रा कोठा घूम कर आ..." मोनी की तरफ़ इशारा करते हुई मौसी ने कहा, "मोनी, अब तो कोठे पे चुदाई का माहौल होगा। ज़रा हमारी नई रंडी रानी को कोठे की चुदाई तो दिखा के ला।" मेरी तरफ़ देखते हुआ मौसी ने कहा, "जा ज़रा चुदाई देख कर आ, अभी ७:३० बज रहे हैं, ८:३० बजे तक आ जाना। तुम दोनों की चूत और चूची का मुज़रा भी तो करना है मुझे।" और इतना कह कर मौसी मुस्कुरा दी
मोनी ने मुझे साथ लिया और बोली - "चल घुमा कर लाती हूँ।"
सबसे पहले हम एक बड़े से हॉल में पहुँचे, "वहाँ सस्ती वाली रंडियों की चुदाई हो रही थी
बग़ल में बहुत से गद्दे पड़े थे, जिन पर रंडियाँ लेटी हुईं थीं। सब मोटी और भद्दी सी थीं और कुछ रिक्शे वाले जैसे लोग उनके ऊपर चढ़े हुए थे। मोनी बोली - "सब की चूत भोंसड़ा हो रहीं हैं। २०-२० साल से चुदवा रहीं हैं, मौसी तो इन्हें भोंसड़ी वाली कह कर बुलाती हैं। सालियाँ एक दिन में १०-१० को निपटा देतीं हैं। आ पास से दिखाती हूँ।"
मैंने पास जाकर दखा तो एक भैंस जैसी मोटी औरत पर एक ५० साल का कमज़ोर सा बुड्ढा चढ़ा हुआ था, औरत की चूचियाँ पेट से चिपक रहीं थीं, बुड्ढा धक्के लगा रहा था। मोनी ने कहा - "जरा इस रसिया का लौड़ा तो देख, झड़ा पड़ा है, फिर भी यह साला चूत पर चढ़ा पड़ा है।"
हम दोनों हँसते हुए आगे बढ़ गए। सब जगह एक सा ही हाल था। मोनी बोली - "इनमें से कई तो ऐसी हैं, अगर १० मिनट से ज्यादा अगर कोई चोदे, तो यह एक झपकी नींद की भी मार लेतीं हैं।" हम दोनों खिलखिला कर हँस पड़े।
अब मोनी मुझे ऊपर वाली मंजिल पर ले गई। वहाँ कई कोठरी जैसे कमरे बने हुए थे।
इस मंजिल पर ५०० से १००० वाली चुदती थीं। मोनी ने कहा - "जितने कमरे बंद हैं, वहाँ लड़कियाँ चुद रहीं हैं, जो खुले हैं वो खाली हैं। एक कमरे में दो या दो से अधिक भी चुद सकती हैं।"
मोनी बोली - "हर कमरे के दरवाज़े पर एक छेद बना हुआ है, अंदर का नज़ारा देखने के लिए। आ... ज़रा झाँक कर लड़कियों की चुदाई देखते हैं।"
मोनी एक-एक छेद में झाँक-झाँक कर देखती जा रही थी। एक जगह उसने कहा - "यहाँ झाँक कर देख, मज़ा आएगा।"
मैंने जब झाँक कर देखा तो मैं देख कर दंग रह गई। अंदर एक लड़की मुँह में लौड़ा लेकर बड़ी मस्ती से लॉलीपॉप की तरह चूस रही थी और लड़का उसके चूतड़ दबा रहा था। कुछ देर बाद लड़के ने लौड़ा मुँह से निकलवा दिया और बोला रानी ज़रा घोड़ी बनो, तुम्हारी चूत पीछे से चोदता हूँ। उसने उसे घोड़ी बना दिया और उसकी चूत में अपना लंड एक झटके में घुसा दिया। लड़की के मुँह से "आह मर गई..." की तेज़ आवाज़ निकली। लड़के ने कमर से पकड़ कर उसकी चूत में तेज़-तेज़ धक्के मारने जारी रखे। लड़की ज़ोरों से चिल्ला रही थी। कुछ देर बाद लड़के ने धक्के मारना धीमा कर दिया और उस पर झुक कर उसकी चूचियाँ बेदर्दी से मसलने लगा। लेकिन रंडी चिल्लाये जा रही थी। ऐसा लग रहा था जैसे उसे बहुत दर्द हो रहा हो।
मोनी बोली - "यह १००० वाली रंडियाँ ऐक्टिंग करने में बहुत तेज़ होतीं हैं। साले का ५ इंच का ही लौड़ा है और यह कुतिया ऐसे चिल्ला रही है जैसे चूत में से बच्चा निकल रहा हो।"
फिर एक और कमरे में मैंने झाँका। अंदर दो लड़के एक लड़की पर चढ़े हुए थे। लड़की सीधी लेटी हुई थी, एक लड़की की जाँघें पकड़ कर फैलाए हुए था और उसकी चूत में सटासट लंड आगे-पीछे कर उसे चोद रहा था, तो दूसरा बगल से रंडी का मुँह तिरछा कर अपना लौड़ा चुसवा रहा था। क़रीब २ मिनट तक लगातार लड़की की चूत चुदती रही। फिर चूत में से लड़के ने लंड खींच लिया उसका लंड झड़ने वाला था। लौण्डे ने कंडोम उतार कर दो झटके लंड पर मारे और ढेर सारा वीर्य लड़की की चूचियों पर गिरा दिया। फिर उसने अपने हाथों से लड़की की चूचियाँ कस-कस कर मसली और अपने गाढ़े लंड-रस से लड़की की मालिश कर दी। दूसरे वाले ने रंडी के मुँह से लंड निकाल लिया था। रंडी बोली तू भी चोद राजा कब तक लंड खड़ा रखेगा। दूसरे वाले का लंड काफ़ी अच्छा था, मेरा मन भी उसके लंड से चुदवाने का करने लग रहा था। दूसरे वाले ने रंडी को घोड़ी बना दिया और उसकी गाण्ड पर ढेर सारा थूक डाल दिया था। रंडी घबरा गई बोली - "राजा गाँड रहने दो, चूत मार लो, बहुत दर्द होगा। आपका लौड़ा बहुत बड़ा है।" लड़का बोला - "गाँड थोड़े ही न मार रहा हूँ, थोड़ा चेक कर रहा हूँ।" कह कर उसने अपनी ऊँगली उसकी गाँड में डाल दी और कस-कस उसे घुमाने लगा।
मुझे यह सब देखने में बड़ा मज़ा आ रहा था। थोड़ी देर में लड़के ने ऊँगली निकाल कर एक झटके में उसकी गाँड में अपना लंड घुसा दिया... लड़की एक दम से चिल्ला पड़ी... ऊही... मर गई..., मर गई...। लड़के ने सटासट उसकी गाँड मारनी जारी रखी। रंडी के चिल्लाने की आवाज़ बाहर तक आ रही थी। मोनी ने पीछे से मेरा पेटीकोट उठा कर मेरी गाँड में अपनी पूरी ऊँगली घुसा दी। मेरे मुँह से एक दम से "उई... मर गई" की आवाज़ निकल गई।
मोनी बोली, "दूसरे की गाँड चुदाई देखने में बड़े मज़े आ रहे हैं। रात को जब तेरी मारी जाएगी, तब देखती हूँ।
मैंने शरमाते हुए एक मुस्कान भरी... मैंने कहा - "मोनी चुदने का अब बहुत मन कर रहा है।"
मोनी बोली - "चुदेगी, तू भी चुदेगी... और आज रात ही चुदेगी... और मोटे लंड से चुदेगी। मौसी तुझे ऐसे ही नही छोड़ेगी।"
मोनी ने आगे बताया - "ये सब रंडियाँ ठेके पर २०-२० दिनों के लिए आतीं हैं। २० दिनों के बाद यह दूसरे कोठे पर चली जाएँगी। इनकी जगह नई आ जाएँगी, ताकि कोठों की रौनक बनी रहे। केवल ५-६ ही यहाँ की परमानेंट रंडियाँ हैं। चल, अब सबसे ऊपर की मंजिल पर चलते हैं, जहाँ मँहगी वाली लड़कियाँ चुदती हैं।
ऊपर वाली मंजिल पर भी कमरे बने हुऐ थे। मोनी ने बताया कि यहाँ मँहगी वाली रंडियाँ चुदतीं हैं। यहाँ कुछ वातानुकूलित कमरे भी हैं, हर कमरे में वीडियो और टीवी है। ग्राहक xxx देखते हुए चोदते हैं। मैं अभी तक हर बार यहीं चुदी हूँ। तू भी इन्ही में से किसी एक कमरे में चुदेगी। अंदर एक कमरे में मैंने झाँक कर देखा तो एक आदमी रंडी को गोद में बिठाए हुए था और उसका लौड़ा उसकी चूत में घुसा हुआ था। दारू का गिलास लड़की के हाथ में था जिससे वह हल्की-हल्की चुस्कियाँ ले रहा था और लड़की के चूची की घुंडियों को नोच रहा था। शायद कोई xxx देख रहा था। बाकी कमरों के छेदों से कुछ लोगो की गाँड के सिवा कुछ नही दिखा।
यह सब देख मैं काफ़ी गरम हो गई थी। राजू और कालू वहाँ चौकीदारी कर रहे थे। मुझे देखकर राजू बोला, "जब से तु्म्हें देखा है, मेरा लंड तो नीचे बैठ ही नहीं रहा है रानी। चूत नही तो एक बार चूचियों का दूध तो पिला दो। इस कालू ने तो फिर भी एक बार तुम्हारी दबा रक्खी हैं।"
राजू की बात सुन कर मैं और मोनी हल्के से मुस्कुरा दिए। मोनी बोली - "क्यों मैडम एक बार इन्हें दूध पिला दें?"
मैंने कहा - "चल, थोड़ा सा दूध इन्हें पिला देते हैं।
हमलोग एक खाली कमरे में आ गए। मेरी चूत चुदने को चुनमुना रही थी। मैंने अपनी ब्लाउज़ का हुक खोल दिया। अब मेरे दोनों संतरे बाहर थे। मैं बोली - "लो राजू, दूध पियो, तुम भी क्या याद रखोगे।"
राजू ने कस-कस कर मेरी दोनों चूचियाँ एक-दूसरे से चिपका दीं और मेरी घुँडियाँ ज़ोर-ज़ोर से चूसने लगा। मुझे गज़ब की मस्ती छाने लगी थी। राजू कस-कस कर मेरे दूध दबा रहा था और मेरी घुँडियाँ जम कर चूसे जा रहा था। मेरी चूत से बुरी तरह से पानी बहने लगा था।
मैंने कहा - "राजू डार्लिंग, मेरी चूत फाड़ो, मेरे होंठ चूस डालो... मुझे आज तुम चोद कर ही छोडना।"
राजू ने मेरी चूचियाँ छोड़ कर, मुझे कस कर अपने से भींच लिया और मेरे मुँह में अपनी जीभ डाल दी और मेरे होंठों को चूसने लगा। राजू का मोटा लंड मेरी चूत से चिपक रहा था, उसने मुझे जोरों से भींच रखा था। मेरे होंठ ज़बर्दस्त तरीके से वो चूस रहा था। तभी मौसी उधर आ गईं और मेरे चूतड़ों पर कस कर हाथ मारती हुई बोली, "अरे मेरे रंडी रानी तुम तो यहाँ रंडीबाज़ी कर रही हो!"
मैं और राजू अब हट गए थे। मोनी मुस्कुरा रही थी। मुझसे रहा नहीं गया, मैंने कहा - "मौसी... अब मुझे चुदवाओ, मैं चुदना चाहती हूँ। मेरी चूत चुदने के लिए फड़क रही है।"
राजू मुस्कुरा रहा था, मौसी ने कहा, "अभी थोड़ी रंडीबाज़ी तो सीख। लंड से तो तू खेली भी नही है> अभी तूने ढंग से लंड देखा भी नहीं है। पहले तू लंड से तो थोड़ा खेलना सीख, चुदवा तो मैं तुझे एक मिनट में दूँगी।" राजू मुस्कुराए जा रहा था।
मौसी बोली - "राजू, पहले तू इसे अपना लंड दिखा।" राजू ने एक झटके से अपना पाजामा उतार दिया। राजू का ८ इंच लंबा और मोटा लंड मेरे सामने था। मैं अपने होठों पर जीभ फिरने लगी थी। मैं इतना मोटा-नंगा लंड इतने क़रीब से आज पहली बार देख रही थी। मौसी पलंग पर बैठ गईं और मुझे भी बगल में बिठा लिया।
राजू को मौसी ने बुलाया और कहा - "जरा इसकी चुचियों पर लंड फिरा।"
मैं पलंग पर बैठी थी और राजू अब मेरी चूचियों पर अपना लंड हाथ से पकड़ कर फिराने लगा। उसने मेरी घुंडियों पर लंड का सुपाड़ा दबा-दबा कर फिराया। मैं पूरी मस्ती में आ गई थी।
मौसी ने राजू का लंड अपने हाथ से पकड़ कर मेरे हाथ में पकड़ा दिया और बोली, "ले जरा इसे मसल और जरा मुट्ठ मार।"
जैसे ही मैंने लौड़ा हाथ में पकड़ा, मैं सनसना गई। लौड़ा बहुत गरम था, मेरी बुर पनिया रही थी। मैं कस-कस कर लौड़ा मसलने लगी। मुझे बहुत मज़ा आ रहा था। राजू मेरे बालों को सहला रहा था।
थोड़ी देर बाद राजू ने मुझे खड़ा कर दिया। मुझे लग रहा था शायद राजू मुझे अब चोद देगा, लेकिन राजू ने एक बार मुझे फिर भींच लिया। अब वह और कस-कस कर मेरे होंठों के बीच से अपनी जीभ डाल कर चूसे जा रहा था।
तभी राजू ने मुझे पीछे की तरफ़ मोड़ दिया, अब मेरा मुँह मौसी की तरफ़ था। राजू ने जोर से मेरी घुँडी नोच ली और मेरी चूचियाँ दबाईं। पीछे से राजू का मोटा लंड कस कर मेरी गाँड दबा रहा था। मौसी आगे बढीं और मेरे पेटीकोट का नाड़ा खोल दिया। राजू ने मुझे ढीला छोड़ दिया। मेरी पेटीकोट अब ज़मीन पर थी।
नंगी गाँड पर राजू का नंगा लंड लगते ही मैं उचक पड़ी। अब मैं चुदवाने की उत्तेजना की चरम सीमा का अनुभव करने लगी थी। दो मिनट बाद मौसी के इशारे पर राजू हट गया। मेरी बुर का पानी जाँघों तक आ रहा था। मैं चिल्ला सी पड़ी, "मौसी मुझे चुदवाओ ना... मेरी चूत में आग लगी पड़ी है, राजू से कहो मेरी चूत चोदे और मेरी प्यास बुझाए।"
मौसी बोली - "गाँड मरवाएगी... तो तुझे चुदवाऊँ।"
में पगला सी रही थी। मैंने कहा - "गाँड, चूत एक से नहीं ६-६ से मरवा लूँगी... प्लीज़ मौसी मुझे चुदवाओ, जल्दी चुदवाओ। राजू से बोलो कि वो अपना लंड जल्दी से मेरी चूत में डाल दे।"
मौसी मुस्कुराई - "ले ज़रा इसे पहले कंडोम पहना अपने हाथ से।"
मैंने कंडोम लेकर राजू के सुपाड़े पर लगाया। एक बड़ा रोमांचकारी अनुभव था।
मौसी बोली - "नीचे तो सरका दे।"
नीचे सरकाने के लिए मुझे एक हाथ से नीचे उसका लंड पकड़ना पड़ा और दूसरे हाथ से मैंने उसे नीचे सरका दिया। मेरी चूत की जलन बढ़ती जा रही थी, मुझे अब लग रहा था कि मेरी चुदाई शुरू होने वाली है।
मौसी राजू से बोली - "जरा इसकी चूत पर दो तीन बार लंड फिरा दे, फिर जरा नीचे चल के इसकी चूत के दर्शन ग्राहकों को कराते हैं।"
राजू ने मुझे पलंग पर लिटा दिया और कस-कस कर मेरी चूत पर अपना लंड फिरा दिया। एक बार उसने आधा इंच लौड़ा मेरी चूत में घुसाया लेकिन मौसी ने उसे डपट कर लौड़ा हटवा दिया।
मौसी ने राजू को हटा दिया और बोली - "चलो अब नीचे चलते हैं, वहाँ इसे ग्राहकों की गोदी में उनके लौड़े पर बिठाती हूँ।"
मैं चुदने को पागल हुई जा रही थी... मुझसे रहा नहीं जा रहा था। मैंने कहा - "मौसी मुझे चुदवाओ, मेरी चूत में जलन हो रही है, मैं पगला सी रही थी।"
मौसी ने मेरी तरफ़ देखा और बोली - "चूत में तो इसके वाक़ई आग लगी हुई है, राजू तू एक काम कर, इसकी चूत को चूस। २-३ मिनट में यह पानी छोड़ देगी फिर इसे थोड़ी सी शान्ति मिलेगी।"
राजू ने अब मेरी चूत पर अपना मुँह लगा दिया और कस-कस कर मेरी चूत चूसने लगा। मौसी के इशारे पर कालू ने मेरा सिर अपनी गोद में रख लिया और मेरी चूचियाँ ज़ोरों से दबाने लगा। राजू कुत्ते की तरह मेरी चूत चाट रहा था। उसने बुरी तरह से मेरी चूत के मुहाने को चाटना जारी रखा।
कुछ देर बाद उसने अपनी जीभ मेरी चूत के अंदर डाल दी और उसकी १ इंच लम्बी जीभ अब मेरी चूत में फिर रही थी। मेरी मस्ती से कमरा उह... आह... उह... आह... ऊह... आह... से गूँज उठा। थोड़ी देर में मेरी चूत से बड़ी तेजी से चूत-रस निकला जिसे राजू लपालप पीने लगा।
मुझे चूत में कुछ शान्ति सी लगी। मौसी ने इसके बाद राजू और कालू को नीचे भेज दिया और बोली - "चल इधर बहुत मस्ती ले ली अब नीचे मस्ती करियो। ये मेरा वादा है कि १२ बजे तक तेरी चूत के अंदर मोटा लंड मैं घुसवा दूँगी और आज रात तेरी गाँड भी ठुकवा दूँगी।"
मैं उठ गई थी, मोनी ने मुझे पेटीकोट और ब्लाउज़ पहना दिया। ९ बजने वाले थे, मौसी ने कहा - "आओ मेरी रंडियों, अब तुम नीचे चलो और थोड़ा धंधा शुरू करो।"
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