मैं अपने कॉलेज में होने वाले टेस्ट की तैयारी कर रही थी। तभी अब्दुल का फोन आया,बानो, क्या कर रही है ? जल्दी से ऊपर आजा एक काम है !

अभी आती हूँ मैंने मोबाईल पजामें में रखा और कमरे से बाहर निकली।

मां की लौड़ी, कहा जा रही है? पढ़ना नहीं है क्या अब्बू ने हांक लगाई।

अब्बू, अब्दुल भैया ने बुलाया है अभी आई ! कह कर मैं सीढ़ियों की तरफ़ भाग चली।

चुदवाने जा रही है भेन की लौड़ी । रास्ते में मौसा जी ने टोका।

मादरचोद, टोक दिया ना साला रोज़ तो चोदता है और फिर भी लार टपकाता है

अरे, बुला रिया है तो मर भोसड़ी की मेरा ही लौड़ा चाटती है और मुझे ही गाली देती है !

मां के लौड़े, आगे और नहीं चोदना है क्या ? चल रास्ता ले गांडू साला ! मैंने उसे प्यार से दुलारा और छलांगे भरती हुई छत पर आ गई। अब्दुल अपनी छत पर खड़ा था। उसने ऊपर आने का इशारा किया। मैं दीवार फ़ांद कर उसकी ऊपर की छत पर आ गई। सामने वही कमरा था जहा अब्दुल या युसुफ़ मेरे साथ मस्ती करते थे।

रात को मस्ती करनी है क्या ?

नहीं रे ! मेरे तो कल टेस्ट है वैसे एक ही टोपिक है चल बता प्रोग्राम?

देख तुझे पैसे भी मिलेंगे और चुदना भी नहीं है बोल मस्ती करना है?

भेनचोद कोई जादू है जो बिना चोदे पैसे दे जायेगा?

देख एक खेल है, उसमें तुझे दो हज़ार रुपया मिलेगा, पांच सौ मेरे !

यानी डेढ़ हजार मेरे बोल बोल जल्दी बोल मजा आ जायेगा !

उसने मुझे खेल के बारे में बता दिया, मैं खुश हो गई पर शंकित मन से पूछा,मुझे चूतिया तो नहीं बना रहा है ना, मालूम पड़ा कि भोसड़ी का मजे भी कर गया और माल भी नहीं मिला?

बस तू आजा रात को वही ग्यारह बजे

मैंने सर हिलाया और वापस लौट आई। रात को दस बजे मैंने खाना खाया फिर अपने बिस्तर पर आराम करने लगी। साले अब्दुल के दिमाग में क्या है? उन लड़कों के नाम भी नहीं बता रहा है और कहता भी है कि तू जानती है मुझे वो अच्छे भी लगते हैं पर कौन ?

मोबाईल की घण्टी बजी, अब्दुल का मिस कॉल था। मैंने चुप से लाईट बन्द की और चुपके से छत पर चली गई। उपर घना अंधेरा था, शायद, अमावस की रात थी। कुछ ही देर में मेरी आंखें अंधेरे की अभ्यस्त हो गई। मैं दीवार फ़ांद कर ऊपर पहुंच गई। मुझे पता था चुदना तो है ही सो कम से कम कपड़े पहन रखे थे। कमरे के दरवाजे पर ही अब्दुल ने कहा,ये पांच सौ रुपये ! अंधेरे कमरे में घुस जा और दो लड़कों में से किसी एक का लण्ड पकड़ कर मुठ मारना है ज्यादा समय, ज्यादा रुपया ये पांच मिनट का पांच सौ है !

क्या बात है अब्दुल, तेरे लण्ड को तो मैं प्यार से पियूँगी।