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में भी
तो आख़िर
इन्सान ही
हूँ में भी
उसे अच्छे से
किस करने लगा
वो मेरी जुबान को चूस रही थी और में उसकी तभी मैने अपना एक हाथ उसके बूब्स पर रख दिया तो उसने कुछ नही बोला बल्कि उसने मेरा दूसरा हाथ पकड़ के उसकी गांड पे लगा दिया और जोर जोर से बोलने लगी ओह रोनी दबाव इसे जोर जोर से दबाव मगर में डर रहा था की कही कैफे पर कोई और कस्टमर आ न जाए सो मैने उसे वही पे रोका और उसको बोला की हम कही अकेले में आराम से मिलके एन्जॉय करेंगे उसने कहा ठीक हे तो में इस सन्डे को सूबे ६ बजे तुम्हारे कैफे पर आउंगी उसने बोला मगर मैने कहा इतनी सुबह क्यों भला उसने कहा सर्दियों के दिन हे सुबहे सुबहे का मजा ही कुछ और आएगा वेसे भी में घर से सुबह वाक् के लिए निकलती हू सो घर पे सब को पता हे और ६ बजे थोड़ा सा अँधेरा भी होगा क्यूकि सर्दी का मोसम था उसने कहा की तुम्हे कोई प्रॉब्लम तो नही हे ना मेने सोचा और अपने आप से कहा एसा मोका फ़िर नही मिलेगा मेने कहा थी हे फ़िर उसने मुझे एक किस की और निकल गई २ दिन बाद सन्डे था में सुबहे सुबहे जल्दी उठा फ्रेश हुआ और फुल स्पीड से कैफे पहुंचा और मेने अन्दर सब ठीक किया थोड़ा रूम फ्रेशनर भी लगा दिया और तभी वो आई और आते ही मुझसे लिपट गई मेने कहा एक मिनिट दरवाजा तो बाँध करने दो फ़िर मेने दरवाजा बंद किया और वो सीधे आके मुझसे लिपट गई फ़िर क्या था वो जोगिंग सुइट में आई थी खुले लंबे बाल हम दोनों ने करीब १० मिनिट तक किस किया और एक बार तो उसने मुझे काटा भी मगर मेने कुछ नही कहा उसे वो कभी गरम हो रही थी मेने उसकी जिप खोली तो उसने अन्दर पिंक कलर की ब्रा पहनी थी जेसे ही मेने बूब्स प्रेस किया वो सिसकिया लेने लगी आःहा जोर से और जोर से उसके बूब्स काफी नरम थे फ़िर मेने ब्रा भी निकली और उसका एक निप्पल मुह में ले लिया बदले में उसने मेरी गांड पे जोर से दबाया और कहा आ मेरे रजा और चूष इसको फ़िर में चूमता हुवा उसके पेट तक आया और बादमे मैने उसके पेंट और पेंटी को भी उतार फेका तभी उसने कहा के एक मिनिट फ़िर उसने मेरे सरे कपड़े निकले और मुझे हर जगह पागलो की तरह चूमने लगी और एक दो बार मैने निप्पल को भी काटा और वो नीचे आके तुंरत ही मेरा लोडा अपने मुह में लेने लगी और मैं अपने होश खो बेठा मानों में किसी स्वर्ग में हू मैने कहा रही अब मत तड़पाओ अकेली अकेली मजा मत लो मुझे भी चाहिए वो तुंरत समझ गई और सोफे पे लेट गई और मुझे अपने ऊपर उल्टा लेटा दिया फ़िर क्या था उसे जो चाहिए था उसे मिल गया और मुझे जो चाहिए था मुझे ६९ में आ गए यारो क्या चूत थी उसकी लगता था उसने कल ही शेव की हो काफी गरम भी थी मेने तुंरत ही अपनी जुबान निकली और कुते की तरह चाटने लगा वो भी काफी मजे से मेरा लोडा चूस रही थी करीब १० मिनट बाद मेरा पानी निकला और उसने बड़े आराम से उसे चाट लिया पूरा का पूरा फ़िर ५ मिनट के बाद उसने फ़िर से मेरे लोड को गरम किया और बोली मेहरबानी करके अब मुझे चोदो मुझसे अब और बर्दास्त नही होता मैने कहा ठीक हे रानी मैने उसकी टांगे चोडी करके अपने कंधे पे लगा दी और अपना लोडा अन्दर किया मगर नही गया और उसे दर्द भी हो रहा था तो मैने कहा क्या हुवा वो बोली एक मिनिट और फ़िर उसने ढेर सारा थूक निकला मेरे लोडे पर और उसकी चूत पर लगाया और अपने हाथो से अपनी चूत को चोदा किया और बोली अब आजा मेरे राजा मेने कहा ये ले और एक ही झटके में पूरा का पूरा अन्दर डाल दिया वो चिल्लाने लगी और मर्जी गांड फटी मैने कहा चिलाओ मत दर्द बहोत हो रहा हे रोनी एक काम करो अब जल्दी से तुम्हारा लोडा अन्दर बाहर करो मैने वेसे ही किया थोडी देर में वो गांड उछाल उछाल के चुदवाने लगी में भी उसके बूब्स को दबा रहा था उसे किस कर रह था थोडी देर के बाद वो बोली के मुझे तुम्हारे ऊपर आना हे मैने कहा ठीक हे में उठा और सोफे पे लेट ने जा रह था की उसे क्या सूझा और वो मेरी गांड में ऊँगली डाल ने की कोशिश कर रही थी के मैने उसका हाथ पकड़ लिया मैने कहा नही पहले मुझे तुम्हारी गांड मारने देनी होगी वो बोली आज नही फ़िर कभी और मुझे धक्का देके मेरे पर चढ़ गई क्या गजब की बाला थी वो मेरे ऊपर क्या मस्त लग रही थी लंबे बाल और बूब्स हिलते हुवे करीब १५ मिनट के बाद मेरा पानी निकल ने वाला था मैने कहा क्या करू उसने कहा अन्दर नही निकलना मुझे पीना हे तुम्हारा गाढा पानी बहुत मस्त चीज़ हे में ने कहा ठीक हे और वो उठ कर मेरा लोडा मुह में ले लिया और सारा पानी पी लिया फ़िर हम लोगो ने करीब आधे घंटे तक एक दूसरे को चूमा सहलया और उसने वादा भी किया के वो मुझे अपनी गांड मारने देगी ....... तो कैसे मैने उसकी गांड मारी मैं आपको दूसरी बार बताऊंगा....
अनिल खुशी से बोला "चुदवाने का इरादा है ...... ठीक है .." अनिल ने स्लीपर का परदा खेंच कर बंद कर दिया. इतने में बस की लाइट भी बंद हो गयी .अनिल ने अपना पेंट नीचे खीच दिया .अब हम दोनों नीचे से बिल्कुल नंगे थे. अनिल ने चादर अपने ऊपर डाल ली. और मुझे कमर से खींच कर मेरी पीठ से चिपक गया. मेरी चिकनी गांड का स्पर्श पा कर उसका लंड फिर से हिलोरें मरने लगा. बार बार मेरी चूतडों की फांकों में घुसने की कोशिश करने लगा. मैंने मुड कर उसकी तरफ़ देखा तो अनिल ने प्यार से मेरे गलों को चूम लिया और नीचे गांड पर जोर लगाया उसका लंड मेरी दोनों गोलाईयों को चीरता हुआ मेरी गांड के छेड़ से टकरा गया. मुझे लग रहा था कि वो जल्दी से अपने लंड को मेरी गांड में घुसेड दे. मैंने एक हाथ बढ़ा कर उसके चूतड पकड़ लिए और अपनी तरफ़ जोर से चिपका लिया. अनिल ने भी अपनी पोसिशन ली और अपने लंड को गांड के छेड़ में दबा दिया. उसकी सुपारी गांड में फक से घुस गयी. मेरे मुंह से आह निकल गयी. उसने अपना लंड थोड़ा बाहर खींचा और फिर से एक झटका दिया. लंड अन्दर घुसता ही चला जा रहा था. जैसा जैसा वो धक्के मरता लंड और अन्दर बैठ जाता. लंड पूरा घुस चुका था. अब अनिल रिलाक्स हो गया. और लेट गया अब वो मजे से गांड चोद रहा था. मुझे भी अब मजा आने लगा था. उसके धक्के अब तेज होने लगे थे. अचानक उसने मुझे सीधा लेटाया और मेरे ऊपर चढ़ गया. और मेरी चूत में अपना लंड घुसेड दिया. लंड बस के झटको और धक्कों से एक बार में अन्दर तक बैठ गया. मैं खुशी के मारे सिसकारी भरने लगी. "धीरे .... नेहा ...धीरे ..." "अनिल ..मैं मर जाऊंगी ...हाय ..." उसने मेरे होटों पर होंट रख दिए जिस से मैं कुछ न बोल सकूँ .....
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