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हम
दोनो काफ़ी
उत्तेजित
हो गये थे. उस
ने आँखें
बंद कर दी थी.
मुझे यहाँ
तक याद है की
अपनी बाहें
लंबी कर उस
ने मुझे
अपने बदन पर
खींच लिया
था, इस के बाद
क्या हुआ और
कैसे हुआ वो
मुझे याद
नहीं. वो जब
चीख पड़ी तब
मुझे होश
आया की मैं
उस के उपर
लेटा था और
मेरा लंड
झिल्ली
तोड़ कर आधा
चूत में घुस
गया था. वो
मुझे धकेल
कर कहती थी :
उतर जाओ, उतर
जाओ, बहुत
दर्द होता
है
मैने उस के होठ चूमे और कहा : ज़रा धीरज धर , अभी दर्द कम हो जाएगा. वो बोली : तू क्या कर रहा है ? मुझे चोद रहा है ? मैं : ना, हम एक दूजे को चोद रहें हें. पारो : मुझे गर्भ लग जाएगा तो ? मैं : कब आई थी तेरी माहवारी ? पारो : आज कल में आनी चाहिए. मैं : तब तो डर ने की कोई बात नहीं है कैसा है अब दर्द ? पारो : कम हो गया है मैं : बाक़ी रहा लंड डाल दूं अब ? वो घबड़ा कर बोली : अभी बाक़ी है ? फिर से दुखेगा ? मैं : नहीं दुखेगा. तू सर उठा कर देख, मैं होले होले डाल उंगा. मैं हाथों के बल अध्धर हुआ. वो हमारे पेट बीच देखने लगी हलका दबाव से मैने पूरा लंड उस की चूत में उतार दिया. अब हुआ क्या की मेरी एक्सात्मेंट बहुत बढ़ गयी थी. दीदी के घर आ कर मुठ मार ने का मौक़ा मिला नहीं था. बड़ी मुश्किल से मैं अपने आप को झड़ ने से रोक रहा था. ऐसे में पारो ने चूत सिकोडी. मेरा लंड डब गया. फिर क्या कहना ? धना धन धक्के शुरू हो गये मैं रोक नहीं पाया. पारो की परवाह किए बिना मैं चोद ने लगा और आठ दस धक्के में झड़ पड़ा. उस ने पाँव लंबे किया और मैं उतरा. उस ने भोस पर पेंटी दबा दी. चूत से ख़ून के साथ मिला हुआ ढेर सारा वीर्य निकल पड़ा. बाथरूम में जा कर हम ने सफ़ाई कर ली वो रो ने लगी मैने उसे बाहों में भर लिया, मुँह चूमा और गाल पर हाथ फ़िरया. वो मुज़ से लिपट कर रोती रही. मैं : क्यूं रोती हो ? अफ़सोस है मुझ सेचुदाई की इस बात का ? मेरे चहेरे पर हाथ फिरा कर बोली : ना , ऐसा नहीं है मैं : बहुत दर्द हुआ ? अभी भी है ? पारो : अभी नहीं है उस वक़्त बहुत दर्द हुआ. मुझे लगा की मेरी ---- मेरी ------ चूत फटी जा रही है लेकिन तू इतनी जल्दी में क्यूं था ? तेरा बदन अकड गया था और तू ने मुझे भिंस डाला था. और --- तेरा ये --- ये --- लंड कितना मोटा हो गया था ? क्या हुआ था तुझे ? मैं : इसे ओर्गाझम कहते हें, जिस वक़्त आदमी सब कुछ भूल जाता है और अदभुत आनंद मेहसूस करता है पारो : लड़कियों को ओर्गाझम नहीं होता ? में : क्यूं नहीं. तुझे मझा ना आया ? पारो : तू चोद ने लगा तब भोस में गुदगुदी होने चली थी, लेकिन तू रुक गया. मैं : अगली बार चोदेन्गे तब मैं तुझे ओर्गाझम करवा उंगा. पारो : अभी करो ना. देखो तेरा ये फिर से खड़ा होने लगा है मैं : हाँ लेकिन तेरी चूत का घाव अभी हरा है मिट ने तक राह देखेंगे, वरना फिर से दर्द होगा और ख़ून निकलेगा. मेरा लंड फिर टन गया था. पारो ने उसे मुट्ठि में थाम लिया और बोली : होने दो जो हॉवे सो. मुझे ये चाहिए ------ मैं ना कैसे कहूँ भला ? मुझे भी चोद ना था. मैने किताब निकली. इन में एक फ़ोटू ऐसा था जिस में आदमी नीचे लेटा था और औरत उस की जांघें पर बैठी थी. मैने ये फ़ोटू दिखा कर कहा : तू ऐसा बैठ सकोगी ? पारो : हाँ , लेकिन इस में आदमी का वो कहाँ है ? मैं : वो औरत की चूत में पूरा घुसा है इस लिए दखाई नहीं देता. आ जा. मैं चित लेट गया. अपने पाँव चौड़े कर वो मेरी जांघें पर बैठ गयी मैने लंड सीधा पकड़ रक्खा, उस ने चूत लंड पर टिकाई. आगे सीखा ने की ज़रूरत ना थी. कुले गिरा कर उस ने लंड चूत में ले लिया. लंड और चूत दोनो गिले थे इस लिए कोई दिक्कत ना हुई. पूरा लंड घुस जाने पर वो रुकी. लंड ने ठुमका लगाया. उस ने चूत सिकोडी. नितंब उठा गिरा कर वो चोद ने लगी चौड़े किए गये भोस के होठ और बीच में टटार क्लैटोरिस मैं देख सकता था. मैने अंगूठा लगा कर क्लैटोरिस सहलाई. आठ दस धक्के में वो थक गयी और मुझ पर ढल पड़ी. लंड को चूत में दबाए रख कर मैने उसे बाहों में भर लिया और पलट कर उपर आ गया. तुरंत उस ने जांघें पसारी और उपर उठा ली. दो तीन धक्के मार कर मैने पूछा : दर्द होता है ? पारो ने ना कही. मैं धीरे गहरे धक्के से चोद ने लगा. पूरा लंड निकाल ता था और घकच से डाल देता था. पारो अपने नितंब हिला ने लगी और मुँह से सी सी सी कर ने लगी योनी में फटाके होने लगे. मैने धके की रफ़्तार बढ़ाई. वो बोली : उसस उसस मुझे कुछ हो रहा है रोहित, ज़ोर से चोदो मुझे. मैं घचा घच्छ, घचा घच्छ धक्के से उसे चोद ने लगा. अचानक उसे ओर्गाझम हो गया. ओर्गाझम दौरान मैं रुका नहीं, धके देता चला. वो बेहोश सी हो गयी ओर्गाझम शांत होने पर उस की चूत की पकड़ क़म हुई. मैने अब धीरे से पाँच सात गहरे धके लगाए और अंत में लंड को चूत की गहराई में पेल कर ज़ोर से झरा.
एक
दूजे से
लिपट कर हम
थोड़ी देर
पड़े रहे.
इतने में
दीदी और
जीजू आ गये
फटा फट हम
ने ताश की
बाज़ी टेबल
पर लगा दी.
जब जीजू ने
पूछा की हम
ने क्या
किया तब
पारो ने
फिर मुँह
माचकोड़ा --
हून्ह --
कहते हुए.
मैने कहा :
हम ताश
खेलते थे,
पारो एक
बार भी
जीती नहीं.
रात का खाना खा कर सब सो गये आज पहली बार पारूल अपने भैया से अलग कमरे में सोई. मैं बिस्तर पड़ा लेकिन नींद नहीं आई. सोच ने लगा, क्या मैने पारो को चोदा था या कोई सपना था ? उस की चूत याद आते ही नर्म लोडा उठाने लग ता था और उस में हल्का सा मीठा दर्द होता था. दर्द से फिर लोडा नर्म पड़ जाता था. इन से तसल्ली हुई की वाकई मैने पारो को चोदा ही था. और दीदी और जीजू सारा दिन कहाँ गये थे ? वापस आने पर दीदी इतनी ख़ुश क्यूं दिखाई देती थी, उस के चहेरे पर निखार क्यूं आ गया था ? जीजू भी कुछ गुनगुना रहे थे. और आज की रात जब पारो बीच में नहीं है तब जीजू दीदी को चोदे बिना छोड़ेंगे नहीं. मुझे पारो की भोस याद आ गयी दीदी की भी ऐसी ही थी ना ? जीजू का लंड कैसा होगा ? पारो को चोद ने का मौक़ा कब मिलेगा ? विचारों की धारा के साथ मेरा हाथ भी लंड पर चलता रहा. दीदी की और पारो की चुदाई सोचते सोचते में झड़ पड़ा. नींद कब आई उस का पता ना चला. दूसरे दिन जीजू को तीन दिन वास्ते बाहर गाँव जाना हुआ. मैने दीदी से पूछा की वो लोग कहाँ गये थे. मुस्कुराती वो बोली : रोहित, ये सब तेरी वजह से हो सका. तू था तो पारो ने हमें अकले जाने दिया. हम गाये थे अहमदाबाद, एक अच्छी सी होटेल में. सारा दिन ख़ाया पिया इधर उधर घुमे और ---- मैं : ---- और जो भी किया, चुदाई की या नही ? जवाब में उस ने चोली नीची कर के आधे स्तन दिखाए. चोट लगी हो वैसे धब्बे पड़े हुए थे. जीजू ने बेरहमी से स्तन मसल डाले थे. मैं : कितनी बार चोदा जीजू ने ? दीदी मुज़ से बड़ी थी फिर भी शरमाई और बोली : तुज़े क्या ? तूने क्या किया सारा दिन ? मैने सब आहेवाल दे दिया. पारो को मैने चोदा जान कर वो इतनी ख़ुश हुई की मुझ से लिपट गयी और गाल पैर किस कर ने लगी मैने पूछा क्यूं वो पारो को अपनी चुदाई देखने ना कहती थी. वो बोली : तेरे जीजू अपनी बहन से शरमाते हें, कहते हें की वो देखती होगी तो उन का वो खड़ा नहीं हो पाएगा मैने इस उलझन का रास्ता निकाल ना था. सब से पहले मैने जा कर दीदी का बेडरूम देखा. कमरा बड़ा था. एक ओर बड़ा पलंग था, दुसरी ओर चौड़ी सिटी थी. पलंग के सामने वाली दीवार में एक बंद दरवाज़ा था. दरवाज़े पर अक बड़ा आईना लगा हुआ था. आईने की वजह साफ़ थी. सिटी के सामने बड़ा स्क्रीन वाला टीवी था, वीडीयो प्लेयर और सीडी प्लेयर के साथ. एक कोने में बाथरूम का दरवाज़ा था. मैने मकान की टूर लगाई बेडरूम की बगल में एक छोटी सी कोटरी पाई . कोटरी में फालतू सामान भरा था. एक दूसरा बंद दरवाज़ा था जो मेरे ख़याल से बेडरूम में खुल ता था. मैने चाकू निकाला और बंद दरवाज़े की पेनल में एक सुराख बना दिया. दरवाज़ा पुराना हो ने से कोई देर ना लगी सुराख से मैने झाँखा तो दीदी का बेडरूम साफ़ दिखाई दिया. मेरा काम हो गया. मैं अब जीजू के लौट आने की राह देख ने लगा. दरमियान मैने वो किताब ठीक से पढ़ ली. काफ़ी जानकारी मिली. बारह साल की कच्ची कँवारी को चोद ने के लिए कैसे गरम किया जाय वहाँ से ले कर तीन बच्चों क शादी शुजा मा को कैसे ओर्गाझम करवाया जाय वो सब पिक्चर्स के साथ उस में लिखा था. किताब पढ़ कर रोज़ मैं हस्त मैथुन कर ता रहा क्यूं की पारो मुझ से दूर रहती थी. एक दिन पारो को एकांत में पा कर किस कर के मैने कहा : चल कुछ दिखा उन. हाथ पकड़ कर मैं उसे कोटरी में ले गया और सुराख दिखाई. उस ने आँख लगा कर देखा तो दंग रह गयी मैने कहा : जीजू आएँगे उसी दिन दीदी को चोदेन्गे. . तू रात को यहाँ आ जाना चुदाई देखने मिलेगी. मैं दीदी से कहूँगा की वो रोशनी बंद ना करे, मेरे गाल पैर चिकोटी काट कर वो बोली : बड़ा शैतान है तू. मैं किस कर ने गया तब ठेंगा दिखा कर वो भाग गयी जीजू शुक्रवार को आए. दूसरे दिन शनिवार था. जीजू सिनेमा के लास्ट शो की टिकटें ले आए. दीदी ने मुझे पारो के साथ बिठाने का प्रयत्न किया लेकिन वो मानी नहीं, मुझे जीजू के साथ बैठना पड़ा. पिक्चर बहुत सेक्सी थी. जीजू एक हाथ से दीदी की जाँघ सहलाते रहे थे. दीदी का हाथ जीजू का लंड टटोल रहा था. शो छूटने के बाद जब घर वापस आए तब रात के बारह बजे थे.
एक
दूजे से
लिपट कर हम
थोड़ी देर
पड़े रहे.
इतने में
दीदी और
जीजू आ गये
फटा फट हम
ने ताश की
बाज़ी
टेबल पर
लगा दी. जब
जीजू ने
पूछा की हम
ने क्या
किया तब
पारो ने
फिर मुँह
माचकोड़ा --
हून्ह --
कहते हुए.
मैने कहा :
हम ताश
खेलते थे,
पारो एक
बार भी
जीती नहीं.
रात का खाना खा कर सब सो गये आज पहली बार पारूल अपने भैया से अलग कमरे में सोई. मैं बिस्तर पड़ा लेकिन नींद नहीं आई. सोच ने लगा, क्या मैने पारो को चोदा था या कोई सपना था ? उस की चूत याद आते ही नर्म लोडा उठाने लग ता था और उस में हल्का सा मीठा दर्द होता था. दर्द से फिर लोडा नर्म पड़ जाता था. इन से तसल्ली हुई की वाकई मैने पारो को चोदा ही था. और दीदी और जीजू सारा दिन कहाँ गये थे ? वापस आने पर दीदी इतनी ख़ुश क्यूं दिखाई देती थी, उस के चहेरे पर निखार क्यूं आ गया था ? जीजू भी कुछ गुनगुना रहे थे. और आज की रात जब पारो बीच में नहीं है तब जीजू दीदी को चोदे बिना छोड़ेंगे नहीं. मुझे पारो की भोस याद आ गयी दीदी की भी ऐसी ही थी ना ? जीजू का लंड कैसा होगा ? पारो को चोद ने का मौक़ा कब मिलेगा ? विचारों की धारा के साथ मेरा हाथ भी लंड पर चलता रहा. दीदी की और पारो की चुदाई सोचते सोचते में झड़ पड़ा. नींद कब आई उस का पता ना चला. दूसरे दिन जीजू को तीन दिन वास्ते बाहर गाँव जाना हुआ. मैने दीदी से पूछा की वो लोग कहाँ गये थे. मुस्कुराती वो बोली : रोहित, ये सब तेरी वजह से हो सका. तू था तो पारो ने हमें अकले जाने दिया. हम गाये थे अहमदाबाद, एक अच्छी सी होटेल में. सारा दिन ख़ाया पिया इधर उधर घुमे और ---- मैं : ---- और जो भी किया, चुदाई की या नही ? जवाब में उस ने चोली नीची कर के आधे स्तन दिखाए. चोट लगी हो वैसे धब्बे पड़े हुए थे. जीजू ने बेरहमी से स्तन मसल डाले थे. मैं : कितनी बार चोदा जीजू ने ? दीदी मुज़ से बड़ी थी फिर भी शरमाई और बोली : तुज़े क्या ? तूने क्या किया सारा दिन ? मैने सब आहेवाल दे दिया. पारो को मैने चोदा जान कर वो इतनी ख़ुश हुई की मुझ से लिपट गयी और गाल पैर किस कर ने लगी मैने पूछा क्यूं वो पारो को अपनी चुदाई देखने ना कहती थी. वो बोली : तेरे जीजू अपनी बहन से शरमाते हें, कहते हें की वो देखती होगी तो उन का वो खड़ा नहीं हो पाएगा मैने इस उलझन का रास्ता निकाल ना था. सब से पहले मैने जा कर दीदी का बेडरूम देखा. कमरा बड़ा था. एक ओर बड़ा पलंग था, दुसरी ओर चौड़ी सिटी थी. पलंग के सामने वाली दीवार में एक बंद दरवाज़ा था. दरवाज़े पर अक बड़ा आईना लगा हुआ था. आईने की वजह साफ़ थी. सिटी के सामने बड़ा स्क्रीन वाला टीवी था, वीडीयो प्लेयर और सीडी प्लेयर के साथ. एक कोने में बाथरूम का दरवाज़ा था. मैने मकान की टूर लगाई बेडरूम की बगल में एक छोटी सी कोटरी पाई . कोटरी में फालतू सामान भरा था. एक दूसरा बंद दरवाज़ा था जो मेरे ख़याल से बेडरूम में खुल ता था. मैने चाकू निकाला और बंद दरवाज़े की पेनल में एक सुराख बना दिया. दरवाज़ा पुराना हो ने से कोई देर ना लगी सुराख से मैने झाँखा तो दीदी का बेडरूम साफ़ दिखाई दिया. मेरा काम हो गया. मैं अब जीजू के लौट आने की राह देख ने लगा. दरमियान मैने वो किताब ठीक से पढ़ ली. काफ़ी जानकारी मिली. बारह साल की कच्ची कँवारी को चोद ने के लिए कैसे गरम किया जाय वहाँ से ले कर तीन बच्चों क शादी शुजा मा को कैसे ओर्गाझम करवाया जाय वो सब पिक्चर्स के साथ उस में लिखा था. किताब पढ़ कर रोज़ मैं हस्त मैथुन कर ता रहा क्यूं की पारो मुझ से दूर रहती थी. एक दिन पारो को एकांत में पा कर किस कर के मैने कहा : चल कुछ दिखा उन. हाथ पकड़ कर मैं उसे कोटरी में ले गया और सुराख दिखाई. उस ने आँख लगा कर देखा तो दंग रह गयी मैने कहा : जीजू आएँगे उसी दिन दीदी को चोदेन्गे. . तू रात को यहाँ आ जाना चुदाई देखने मिलेगी. मैं दीदी से कहूँगा की वो रोशनी बंद ना करे, मेरे गाल पैर चिकोटी काट कर वो बोली : बड़ा शैतान है तू. मैं किस कर ने गया तब ठेंगा दिखा कर वो भाग गयी जीजू शुक्रवार को आए. दूसरे दिन शनिवार था. जीजू सिनेमा के लास्ट शो की टिकटें ले आए. दीदी ने मुझे पारो के साथ बिठाने का प्रयत्न किया लेकिन वो मानी नहीं, मुझे जीजू के साथ बैठना पड़ा. पिक्चर बहुत सेक्सी थी. जीजू एक हाथ से दीदी की जाँघ सहलाते रहे थे. दीदी का हाथ जीजू का लंड टटोल रहा था. शो छूटने के बाद जब घर वापस आए तब रात के बारह बजे थे.
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